सोमवार, 15 फ़रवरी 2010

एक ग़ज़ल दोस्तों के नाम.

प्रिय मित्रो
नमस्कार

कल एक पुराने मित्र से मुलाकात हुई जो कि यम बी में हमारे साथ थाबहुत ही अच्छा लगा सच में दोस्ती होती ही ऐसी हैतो उन्ही दोस्तों के नाम पेश है ' हसरत जयपुरी' की कलम से निकली ग़ज़ल..............

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

बनता है मेरा काम तुम्हारे ही काम से
होता है मेरा नाम तुम्हारे ही नाम से
तुम जैसे मेहरबां का सहारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

जब आ पडा है कोई भी मुश्किल का रास्ता
मैंने दिया है तुम को मुहब्बत का वास्ता
हर हाल में तुम्हीं को पुकारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

यारों ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया
सौ बार शुक्रिया अरे सौ बार शुक्रिया
बचपन तुम्हारे साथ गुज़ारा है दोस्तो
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों


उम्मीद है कि दोस्तों को जरुर पसंद आयेगी...


धन्यवाद

आपका वैभव

8 टिप्‍पणियां:

Vaibhav ने कहा…

bahut khoob

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत अच्छी गज़ल हैिसे पढवाने के लिये शुक्रिया। शुभकामनायें

संजय भास्कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Arshad Ali ने कहा…

वाह!
मज़ा आ गया
ब्लोग्वानी सदस्य के रूप में आपका स्वागत है
हसरत जयपुरी साहब की इस शानदार ग़जल के लिए धन्यवाद् .

INDRADHANUSH ने कहा…

Welcome

shama ने कहा…

Bada yaadgaar geet hai yah!

kshama ने कहा…

Snehil swagat hai...

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } ने कहा…

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
कलम के पुजारी अगर सो गये तो
ये धन के पुजारी
वतन बेंच देगें।



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