प्रिय मित्रो।
नमस्कार।
कल एक पुराने मित्र से मुलाकात हुई जो कि यम बी ए में हमारे साथ था। बहुत ही अच्छा लगा सच में दोस्ती होती ही ऐसी है। तो उन्ही दोस्तों के नाम पेश है ' हसरत जयपुरी' की कलम से निकली ए ग़ज़ल..............
एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों
बनता है मेरा काम तुम्हारे ही काम से
होता है मेरा नाम तुम्हारे ही नाम से
तुम जैसे मेहरबां का सहारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों
जब आ पडा है कोई भी मुश्किल का रास्ता
मैंने दिया है तुम को मुहब्बत का वास्ता
हर हाल में तुम्हीं को पुकारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों
यारों ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया
सौ बार शुक्रिया अरे सौ बार शुक्रिया
बचपन तुम्हारे साथ गुज़ारा है दोस्तो
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों
उम्मीद है कि दोस्तों को जरुर पसंद आयेगी...
धन्यवाद ।
आपका वैभव।
सोमवार, 15 फ़रवरी 2010
संस्कृति के ठेकेदार
प्रिय मित्रो
नमस्कार।
कल वी डे था। मेरी उम्र के नवजवान अपने प्यार की खातिर अपनी महिला मित्रो के साथ गुलाब के फूलो से ये दिन मनाते है। हमारी संस्कृति में इस तरह का दिन मनाने की कोई जगह नहीं है। मै सहमत हूँ पर ये मेरी मर्जी है कि मै ये दिन मानू या न मानूँ मुझे ये समझ में नहीं आता है कि जब अप इतने बड़े ठेकेदार है तो आप समाज में फैली और बुराइयों पे क्यों नहीं मुखर होते है। और हम लोकतंत्र में जीते है हमे पूरा हक है अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की। और फिर जब लोकतंत्र में आस्था है तो आप विरोध के नाम पर कार्ड जलाकर..लोगो को पकड़ कर उन्हें पीटने और समझाने का हक आपको किसने दिया...इन संस्कृति के ठेकेदारों को चाहिए कि जरा गौर से बैठ के अपनी संस्कृति और उसमे अभी तक हुए कारनामो पर नज़र डालें। आपको बहुत कुछ पता चल जायेगा...और जो लोग प्यार का दिन मनाते है...उन्हें रोकने का हक या ठेका भारत का कानून आपको नहीं देता है। मेरी तो ये गुजारिश है की अगर प्यार के नाम पर कोई भद्दा काम कर रहा है तो आप प्रशासन से शिकायत करिये न की आप ठेकेदार बनेगे...और कृपा करके संस्कृति के तो ठेकेदार न ही बनिए...और कभी हमारे धर्म को नजदीक से देखिये, प्यार को तो बड़ी इज्जत दी गई है..कृष्ण का गोपियों से रास लीला तो जन जन में व्याप्त है...हालाकि मै कोई इस दिन का बहुत प्रबल समर्थक नहीं हूँ। पर विरोध का कारन भी तो नहीं समझ में आता है..और कृपा करके संस्कृति को तो बीच में बिलकुल ही न खीचे...बड़ी कृपा होगी।
जय हिंद।
आपका वैभव
नमस्कार।
कल वी डे था। मेरी उम्र के नवजवान अपने प्यार की खातिर अपनी महिला मित्रो के साथ गुलाब के फूलो से ये दिन मनाते है। हमारी संस्कृति में इस तरह का दिन मनाने की कोई जगह नहीं है। मै सहमत हूँ पर ये मेरी मर्जी है कि मै ये दिन मानू या न मानूँ मुझे ये समझ में नहीं आता है कि जब अप इतने बड़े ठेकेदार है तो आप समाज में फैली और बुराइयों पे क्यों नहीं मुखर होते है। और हम लोकतंत्र में जीते है हमे पूरा हक है अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की। और फिर जब लोकतंत्र में आस्था है तो आप विरोध के नाम पर कार्ड जलाकर..लोगो को पकड़ कर उन्हें पीटने और समझाने का हक आपको किसने दिया...इन संस्कृति के ठेकेदारों को चाहिए कि जरा गौर से बैठ के अपनी संस्कृति और उसमे अभी तक हुए कारनामो पर नज़र डालें। आपको बहुत कुछ पता चल जायेगा...और जो लोग प्यार का दिन मनाते है...उन्हें रोकने का हक या ठेका भारत का कानून आपको नहीं देता है। मेरी तो ये गुजारिश है की अगर प्यार के नाम पर कोई भद्दा काम कर रहा है तो आप प्रशासन से शिकायत करिये न की आप ठेकेदार बनेगे...और कृपा करके संस्कृति के तो ठेकेदार न ही बनिए...और कभी हमारे धर्म को नजदीक से देखिये, प्यार को तो बड़ी इज्जत दी गई है..कृष्ण का गोपियों से रास लीला तो जन जन में व्याप्त है...हालाकि मै कोई इस दिन का बहुत प्रबल समर्थक नहीं हूँ। पर विरोध का कारन भी तो नहीं समझ में आता है..और कृपा करके संस्कृति को तो बीच में बिलकुल ही न खीचे...बड़ी कृपा होगी।
जय हिंद।
आपका वैभव
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010
मुंबई की सेना
नमस्कार मित्रो।
पिछले काफी समय से ये देखा जा रहा है क़ि किस तरह मुंबई में एक समानान्तर सरकार 'टी' कंपनी अर्थात ठाकरे परिवार के द्वारा चलाई जा रही है। जबकि कांग्रेस की सरकार कह रही है या कर भी रही है कार्यवाई पर मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर हो क्या रहा है। भारत के एक बड़े महानगर में क्या चन्द लोग इस देश के कानून और सविंधान से उपर है। और अगर अशोक चावान इतने ही गंभीर है तो क्यों न वे इन कथित सेना के सिपाहियों पर कड़ी से कड़ी धाराओ में या रासुका में उन्हें बंद करे और जमानत न मिलने पाए। मै उनके विचारो का विरोधी नहीं हूँ परून्तु हिंषा का सख्त विरोधी हूँ। और जो हिंषा हो रही है। उसके लिए सरकार को कड़े से कड़े कानून बनाकर इन लोगो को रोकना चाहिए। मेरा ठाकरे परिवार से भी ये अनुरोध है की आप कानून अपने हाथ में न ले अपना विरोध शांति पूर्वक करे। आज राज ठाकरे का भी एक बयां आया है जिसमे उन्होंने आज बच्चन को निशाना बनाया है... मैं तो जानना चाहता हूँ कि कब तक इस तरह की राजनीति तबाह करती रहेगी ...मेरा युवा मन कभी कभी अपने देश के इन महान नेतओ को देखकर व्यथित हो जाता है।
धन्यवाद,।
आपका वैभव
पिछले काफी समय से ये देखा जा रहा है क़ि किस तरह मुंबई में एक समानान्तर सरकार 'टी' कंपनी अर्थात ठाकरे परिवार के द्वारा चलाई जा रही है। जबकि कांग्रेस की सरकार कह रही है या कर भी रही है कार्यवाई पर मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर हो क्या रहा है। भारत के एक बड़े महानगर में क्या चन्द लोग इस देश के कानून और सविंधान से उपर है। और अगर अशोक चावान इतने ही गंभीर है तो क्यों न वे इन कथित सेना के सिपाहियों पर कड़ी से कड़ी धाराओ में या रासुका में उन्हें बंद करे और जमानत न मिलने पाए। मै उनके विचारो का विरोधी नहीं हूँ परून्तु हिंषा का सख्त विरोधी हूँ। और जो हिंषा हो रही है। उसके लिए सरकार को कड़े से कड़े कानून बनाकर इन लोगो को रोकना चाहिए। मेरा ठाकरे परिवार से भी ये अनुरोध है की आप कानून अपने हाथ में न ले अपना विरोध शांति पूर्वक करे। आज राज ठाकरे का भी एक बयां आया है जिसमे उन्होंने आज बच्चन को निशाना बनाया है... मैं तो जानना चाहता हूँ कि कब तक इस तरह की राजनीति तबाह करती रहेगी ...मेरा युवा मन कभी कभी अपने देश के इन महान नेतओ को देखकर व्यथित हो जाता है।
धन्यवाद,।
आपका वैभव
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